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मुंहासों के दाग-धब्बे के लिए घरेलू नुस्खे........

*टमाटर के रस में रुई भिगोकर दागो पर मलें। या टमाटर में नींबू की दस-बारह बूंदे मिलाएं इस मिश्रण को चेहरे पर मलने से दाग- धब्बे दूर होते हैं। *जायफल को घिसकर दस पीसी काली मिर्च व थोड़े कच्चे दूध में मिलाकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं। दो घंटे बाद चेहरा धो लें। *मसूर की दाल और बरगद के पेड़ की नर्म पत्तियां पीसकर लेप करें *सूखी हल्दी की गांठ को नींबू के रस में घिस कर लगाने से भी दाग- धब्बे तेजी से मिटने लगते हैं। *त्वचा पर जहां पर चकते हो उन पर नींबू का टुकड़ा रगड़े या नींबू में फिटकरी भरकर रगड़े। इससे चकते हल्के पड़ जाएंगे और त्वचा में निखार आएगा।

बादाम रोगन के फायदे -----

बोर्नविटा , कॉम्प्लान आदि पर हज़ारों रुपये खर्च करने की बजाये बादाम रोगन ख़रीदे। - सोने से पूर्व आँखों के चारों ओर बादाम रोगन की हल्की-हल्की मालिश करने से चेहरे पर निखार आता है और झुर्रियां नहीं पड़ती। - सिर की खुश्की मिटाने के लिए सिर पर बादाम रोगन की मालिश करें।

नींबू के उपयोग -----

नींबू को विटामिन ''सी'' का सबसे अच्छा स्त्रोत व स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक माना जाता है। विशेषकर पेट से संबंधित समस्याओं के लिए नींबू का प्रयोग अनेक तरीकों से किया जाता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं नींबू के ऐसे ही कुछ प्रयोगों के बारे में जिनसे आप कई छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं से निजात पा सकते हैं।

जायफल के 33 उपयोग जो आपने नहीं सुने होंगे

रसोई का मसाला जायफल गुणकारी औषधि भी है.आयुर्वेद में जायफल को वात एवं कफ नाशक बताया गया है।  आमाशय के लिए उत्तेजक होने से आमाशय में पाचक रस बढ़ता है, जिससे भूख लगती है। आंतों में पहुंचकर वहां से गैस हटाता है। ज्यादा मात्रा में यह मादक प्रभाव करता है। इसका प्रभाव मस्तिष्क पर कपूर के समान होता है, जिससे चक्कर आना, प्रलाप आदि लक्षण प्रकट होते हैं। इससे कई बीमारियों में लाभ मिलता है तथा सौन्दर्य सम्बन्धी कई समस्याओं से भी निजात मिलती है। 1. सुबह-सुबह खाली पेट आधा चम्मच जायफल चाटने से गैस्ट्रिक, सर्दी-खांसी की समस्या नहीं सताती है। पेट में दर्द होने पर चार से पांच बूंद जायफल का तेल चीनी के साथ लेने से आराम मिलता है।

झुर्रियाँ हटाने के लिए कुछ घरेलु उपाए

आधा चम्मच दुध की ठंडी मलाई में नींबु के रस की चार पाँच बूंदें मिलाकर झुर्रियाँ पर सोते समय अच्छी तरह मलें। पहले गुनगुने पानी से चेहरा अच्छी मलें। फिर गुनगुने पानी से चेहरा अच्छी तरह धोएं और बाद में खुरदरे तौलिए से रगड-पौंछकर सुखा लें। इसके बाद मलाई दोनों हथेलियों से तब तक मलते रहें जब तक कि मलाई घुलकर त्वचा में रम न जाए। बीस मिनट या आधा घण्टे बाद स्नान कर लें या पानी से धो डालें परन्तु साबुन का प्रयोग न  करें। नित्य १५ - २० दिन तक नियमित प्रयोग से झुर्रियाँ दुर होती हैं तथा चेहरे के काले दाग मिट जाते हैं। 1. पके हुए पपीते का एक टुकडा काटकर चेहरे पर घिसें या गूदा मसलकर चेहरे पर लगाएं। कुछ देर बाद स्नान कर लें। कुछ दिन लगातार ऐसा करने से चेहरे की झुर्रियाँ, धब्बे, दूर होते हैं, मैल नष्ट होता है। व मुहाँसे मिटकर चेहरे की रंगत निखरती है।

फटी एड़ियो का उपचार.....

शरीर में उष्णता या खुश्की बढ़ जाने, नंगे पैर चलने-फिरने, खून की कमी, तेज ठंड के प्रभाव से तथा धूल-मिट्टी से पैर की एड़ियां फट जाती हैं। यदि इनकी देखभाल न की जाए तो ये ज्यादा फट जाती हैं और इनसे खून आने लगता है, ये बहुत दर्द करती हैं। एक कहावत शायद इसलिए प्रसिद्ध है- जाके पैर न फटी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई। घरेलू इलाज * अमचूर का तेल 50 ग्राम, मोम 20 ग्राम, सत्यानाशी के बीजों का पावडर 10 ग्राम और शुद्ध घी 25 ग्राम। सबको मिलाकर एक जान कर लें और शीशी में भर लें। सोते समय पैरों को धोकर साफ कर लें और पोंछकर यह दवा बिवाई में भर दें और ऊपर से मोजे पहनकर सो जाएं। कुछ दिनों में बिवाई दूर हो जाएगी, तलवों की त्वचा साफ, चिकनी व साफ हो जाएगी।

सुन्दरता को निखारिये आसन उपायों से...

कच्चे दूध में रूई का फाहा भिगोकर चेहरा साफ़ करने से कील मुहाँसे और झाँई दूर होकर त्वचा स्वस्थ बनती है। हल्दी और चंदन का चूर्ण दूध में भिगोकर चेहरे पर लगाने से थकी और मुरझाई त्वचा स्वस्थ होती है। तरबूज़ के रस को चेहरे पर लगाएँ और सूख जाने पर धो दें। इससे दाग धब्बे दूर होते हैं तथा त्वचा साफ़ होकर निखर जाती है। मसूर की दाल और दूध के उबटन में घी मिलाकर शरीर पर लगाने से त्वचा नर्म और चमकदार बन जाती है। एक एक-एक चम्मच ग्लिसरीन, गुलाबजल और नींबू का रस मिलाकर हाथों से मलें और सूख जाने पर धो दें। इससे सख्त हाथ मुलायम हो जाएँगे। उँगलियों पर ज़रा-सा बादाम या जैतून का तेल लेकर नियमित रूप से भौंहों और बरौनियों पर लगाने से वे घनी और चमकदार बन जाती हैं। बालों में चमक लाने के लिए १ प्याला पानी मे ३ बडे चम्मच सफेद सिरका मिलाकर लगाएँ और १५ मिनट बाद धो दें। आँखों के पास गहरे घेरों और सूजन के लिए खीरे के पतले टुकड़ों को आँखों पर रखकर बीस मिनट आराम करें, फिर चेहरा धो दें।

पुदीने के उपयोग -----

पुदीने का उपयोग अधिकांशतः चटनी या मसाले के रूप में किया जाता है। पुदीना एक सुगंधित एवं उपयोगी औषधि है। यह अपच को मिटाता है। आयुर्वेद के मतानुसार पुदीना, स्वादिष्ट, रुचिकर, पचने में हलका, तीक्ष्ण, तीखा, कड़वा, पाचनकर्ता, उलटी मिटाने वाला, हृदय को उत्तेजित करने वाला, शक्ति बढ़ानेवाला, वायुनाशक, विकृत कफ को बाहर लाने वाला, गर्भाशय-संकोचक, चित्त को प्रसन्न करने वाला, जख्मों को भरने वाला, कृमि, ज्वर, विष, अरुचि, मंदाग्नि, अफरा, दस्त, खाँसी, श्वास, निम्न रक्तचाप, मूत्राल्पता, त्वचा के दोष, हैजा, अजीर्ण, सर्दी-जुकाम आदि को मिटाने वाला है।

साधारण '' कारगर '' नुस्खे, जो हर दिन आपके काम आएंगे

- पके हुए केले को अच्छी तरह से मैश करें और चेहरे पर फेसपैक की तरह लगाएं। करीब 15 मिनट बाद धो लें। ऐसा करने से चेहरे की त्वचा में निखार आता है। - दो चम्मच शहद और एक चम्मच नींबू के रस का मिश्रण त्वचा पर लगाएं। करीब 20 मिनिट बाद इसे साफ कर लें, त्वचा नर्म और मुलायम हो जाएगी।

तुलसी के उपयोग..

तुलसी में गजब की रोगनाशक शक्ति है। विशेषकर सर्दी, खांसी व बुखार में यह अचूक दवा का काम करती है। इसीलिए भारतीय आयुर्वेद के सबसे प्रमुख ग्रंथ चरक संहिता में कहा गया है। - तुलसी हिचकी, खांसी,जहर का प्रभाव व पसली का दर्द मिटाने वाली है। इससे पित्त की वृद्धि और दूषित वायु खत्म होती है। यह दूर्गंध भी दूर करती है।

संतरे के उपयोग..

विटामिन सी से भरपूर संतरा पोषकीय तत्वों और रोग निवारक क्षमताओं से युक्त एक अत्यंत उपयोगी फल है नींबू परिवार का.. - एक सामान्य आकार के संतरे में पाए जाने वाले तत्वों का विवरण इस प्रकार है। प्रोटीन-0.25 ग्राम, कार्बोज 2.69 ग्राम, वसा 0.03 ग्राम, कैल्शियम 0.045 प्रतिशत, फास्फोरस 0.021 प्रतिशत, लोहा 5.2 प्रतिशत, तांबा 0.8 प्रतिशत। - संतरे की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि इसका रस शरीर के अंदर पहुंचते ही रक्त में रोग निवारणीय कार्य प्रारंभ हो जाता है। इसमे ं पाए जाने वाले ग्लूकोज एवं डेक्सट्रोज जैसे जीवनशक्ति प्रदान करने वाले तत्व पचकर शक्तिवर्धन का कार्य करने लगते हैं। इसका रस अत्यंत दुर्बल व्यक्ति को भी दिया जा सकता है। - संतरे में पाये जाने वाले उपयोगी तत्वों के कारण यह अनेक शारीरिक रोगों से मुक्ति दिलाता है।

गले में खराश के घरेलू नुस्खे

सर्दियों के मौसम में सर्दी-जुकाम व गले में खराश होना एक आम बात है। सर्दी-जुकाम होने से पहले आपके गले में दर्द व खराश जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। लंबे समय तक गले में खराश होना काफी तकलीफदेह हो जाता है साथ ही यह आपके गले को भी जाम कर देता है। गले मे होने वाली खराश अन्य बीमारियों की तरह लंबे समय तक नही रहती लेकिन कुछ ही दिनों में यह आपको पूरी तरह से प्रभावित कर बीमार कर देती हैं। क्या है गले की खराश गले में खराश एक बहुत ही सामान्य श्वसन समस्या है। यह मूल रूप से तब होती है जब गले की नाजुक अंदरूनी परत वायरस/ बैक्टीरिया से संक्रमित होती है, जिसके परिणामस्वरूप सूजन, स्राव खांसी और शरीर के सामान्य संक्रमण के प्रभाव के लक्षण होते हैं। कभी-कभी लंबे समय तक गले में रहने वाली खराश किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं और पूरी चिकित्सा लें।

हल्दी वाले दूध के उपयोग..

- रात को सोते समय देशी गाय के गर्म दूध में एक चम्मच देशी गाय का घी और चुटकी भर हल्दी डालें . चम्मच से खूब मिलाकर कर खड़े खड़े पियें. - इससे त्रिदोष शांत होते है. - संधिवात यानी अर्थ्राईटिस में बहुत लाभकारी है. - किसी भी प्रकार के ज्वर की स्थिति में , सर्दी खांसी में लाभकारी है. - हल्दी एंटी माइक्रोबियल है इसलिए इसे गर्म दूध के साथ लेने से दमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों में कफ और साइनस जैसी समस्याओं में आराम होता है. यह बैक्टीरियल और वायरल संक्रमणों से लड़ने में मदद करती है.

सौंठ के आयुर्वेदिक उपयोग

सौंठ में अदरक के सारे गुण मौजूद होते हैं। सौंठ दुनिया की सर्वश्रेष्ठवातनाशक औषधि है. आम का रस पेट में गैस न करें इसलिए उसमें सौंठ और घी डाला जाता है। सौंठ में उदरवातहर (वायुनाशक) गुण होने से यह विरेचन औषधियों के साथ मिलाई जाती है। यह शरीर में समत्व स्थापित कर जीवनी शक्ति और रोग प्रतिरोधक सामर्थ्य को बढ़ाती है । बहुधा सौंठ तैयार करने से पूर्व अदरख को छीलकर सुखा लिया जाता है । परंतु उस छीलन में सर्वाधिक उपयोगी तेल (इसेन्शयल ऑइल) होता है, छिली सौंठ इसी कारण औषधीय गुणवत्ता की दृष्टि से घटिया मानी जाती है । वेल्थ ऑफ इण्डिया ग्रंथ के विद्वान् लेखक गणों का अभिमत है कि अदरक को स्वाभाविक रूप में सुखाकर ही सौंठ की तरह प्रयुक्त करना चाहिए । तेज धूप में सुखाई गई अदरक उस सौंठ से अधिक गुणकारी है जो बंद स्थान में कृत्रिम गर्मी से सुखाकर तैयार की जाती है ।  गर्म प्रकृति वाले लोगो के लिए सौंठ अनुकूल नहीं है.

अनार के उपयोग..

* रोज एक गिलास अनार का जूस पीजिए। अनार का रस पेट पर जमी चर्बी तथा कमर पर टायर की तरह लटकते मांस को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। * अपच : यदि आपको देर रात की पार्टी से अपच हो गया है तो पके अनार का रस चम्मच, आधा चम्मच सेंका हुआ जीरा पीसकर तथा गुड़ मिलाकर दिन में तीन बार लें। * प्लीहा और यकृत की कमजोरी तथा पेटदर्द अनार खाने से ठीक हो जाते हैं।

आंवले के उपयोग..

आंवले को आयुर्वेद में गुणों की खान माना गया है। यह कई बीमारियों को दूर करता है। इसका अपना पौष्टिक महत्व भी है। संतरे से बीस गुना ज्यादा विटामिन सी इसमें पाया जाता हैं। आंवले को गूजबेरी के नाम से भी जाना जाता हैं। आंवले का सबसे बड़ा गुण यह है कि इसे पकाने के बाद भी इसमें मौजूद विटामिन सी खत्म नहीं होता।आज हम आपको बताने जा रहे हैं आंवले के कुछ ऐसे ही पौष्टिक गुणों के बारे में...... -आंवला मोतियाबिंद की परेशानी में फायदेमंद रहता है। - सुबह नाश्ते में आंवले का मुरब्बा खाने से आ प स्वस्थ बने रह सकते हैं।

गुटका,तंबाकू,बी ड़ी सिगरेट,शराब से मुक्ति

अदरक के छोटे छोटे टुकड़े कर लो उस मे नींबू निचोड़ दो थोड़ा सा काला नमक मिला लो और इसको किसी कांच या चीनी के बर्तन में डाल कर धूप मे सूखा लो l जब इसका पूरा पानी खतम हो जाए और अदरक सूख जाए तो इन अदरक के टुकड़ो को किसी कांच के बर्तन में रख लो l जब भी गुटका,तंबाकू,बी ड़ी सिगरेट,शराब पीने का मन करे तो आप एक अदरक का टुकड़ा निकालो मुंह मे रखो और चूसना शुरू कर दो l इसको चूसते रहो आपको गुटका खाने की तलब ही नहीं उठेगी, तंबाकू सिगरेट लेने की इच्छा ही नहीं होगी शराब पीने का मन ही नहीं करेगा l

बालों को झडऩे से रोकने के लिए कुछ खास नुस्खे..

बालों का झडऩा ऐसी समस्या है, जो किसी को भी तनाव में डाल सकती है। आज हर दूसरेव्यक्ति को बालों की समस्या से जूझना पड़ता है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो नीचे दिए आयुर्वेदिक नुस्खे एक बार जरूर अपनाएं। - नारियल के तेल में कपूर मिलाएं और यह तेल अच्छी तरह बालों में तथा सिर पर लगाएं। कुछ ही दिनों डेंड्रफ की समस्या से राहत मिलेगी।

गाय के घी का महत्त्व

आज खाने में घी ना लेना एक फेशन बन गया है . बच्चे के जन्म के बाद डॉक्टर्स भी घी खाने से मना करते है . दिल के मरीजों को भी घी से दूर रहने की सलाह दी जाती है .ये गौमाता के खिलाफ एक खतरनाक साज़िश है . रोजाना कम से कम २ चम्मच गाय का घी तो खाना ही चाहिए . - यह वात और पित्त दोषों को शांत करता है . - चरक संहिता में कहा गया है की जठराग्नि को जब घी डाल कर प्रदीप्त कर दिया जाए तो कितना ही भारी भोजन क्यों ना खाया जाए , ये बुझती नहीं .

शहद और दालचीनी से करें रोगों का निवारण

शहद और दाल चीनी के मिश्रण में मानव शरीर के अनेकों रोगों का निवारण करने की अद्भुत शक्ति है। दुनियां के करीब सभी देशों में शहद पैदा होता है। आज के वैग्यानिक इस तथ्य को स्वीकार कर चुके हैं कि शहद कई बीमारियों की अचूक औषधि है। वैग्यानिक कहते हैं कि शहद मीठा जरूर है लेकिन अगर इसे सही मात्रा में सेवन किया जावे तो मधुमेह रोगी भी इससे लाभान्वित सकते हैं। हृदय रोगों में उपयोगी है--- शहद और दालचीनी के पावडर का पेस्ट बनाएं और इसे रोटी पर चुपडकर खाएं। घी या जेली के स्थान पर यह पेस्ट इस्तेमाल करें। इससे आपकी धमनियों में कोलेस्टरोल जमा नहीं होगा और हार्ट अटेक से बचाव होगा।

खराश मिटाने वाले उपाय

गले में खराश की समस्या सामान्य रूप से वाइरस या बैक्टिरिया के संक्रमण के कारण होती है। कभी - कभी एंटिबायोटिक्स लेने पर भी खराश पीछा नहीं छोड़ती है। माना जाता है ऐसा पेट के एसिड में अनैसर्गिक कमी होने का कारण हो सकता है। ऐसे में घरेलु उपचार ही सबसे कारगर होते हैं। अगर लंबे समय से गले की खराश से परेशान हैं तो नीचे लिखे उपाय जरूर अपनाएं। - 1-2 लहसुन की कलियाँ और 2 लौंग लेकर उसका पेस्ट बनाये और उसे 1 कप मधु के साथ मिलाएं। इस घोल का 1 चम्मच सुबह शाम सेवन करें। - गरम दूध में जरा सा हल्दी पावडर मिला के सोने से पहले सेवन करने पर भी आराम मिलता है। - एक पूरा प्याज को थोड़े से पानी में उबालें।उसके बाद उसेपीस कर उसमे थोड़ा मक्खन नमक मिला ले और इस पेस्ट का सेवन करें। एक बार में ही आराम मिल जायेगा। - शहद में अदरक का रस मिलाकर सेवन करें। - सौंफ चबाने से भी गले की खराश दूर होती है। - तुलसी की पत्तियों को उबालकर पीने से गले की खराश दूर हो जाती है।

मुंहासे , बच्चो के पेट में कीड़े , चोट लगना, खून बहना

नुसखे ============= बच्चो के पेट में कीड़े ------------------------- * कृमि की अवस्था में खाली पेट अनन्नास सेवन करना चाहिए क्योंकि यह कृमि नाशक है। पेट में कृमि होने पर अनन्नास सेवन करने से सप्ताह भर में ही कृमि दूर हो जाते हैं। इस दृष्टि से यह बच्चों के लिए भी विशेष उपयोगी है। * यदि बच्चों के पेट में कीड़े पड़ गए हों तो प्याज का रस पिलाने से कीड़े मर कर निकल जायेंगे। मुंहासे